अफीम की खेती से करड़ावद को मिली पहचान,,नारकोटिक्स विभाग द्वारा समय-समय पर फसल का सीमांकन किया जाता है..

#Jhabuahulchul
सारंगी@संजय उपाध्याय
ग्राम पंचायत करड़ावद यहाँ होती है अफीम कि फ़सल किसानो को होता अच्छा मुनाफा ग्राम पंचायत करड़ावद कि कुल आबादी लगभग 9000 के करीब है उक्त ग्राम पेटलावद- बदनावर मार्ग परस्थित है यहां से रतलाम उज्जैन दाहोद झाबुआ राजगढ़ पर आसानी से सड़क मार्ग के द्वारा पहुंच सकते हैं क्षेत्र के किसानों के द्वारा व्यापारिक दृष्टि से रतलाम जावरा मंदसौर नीमच मंडियों में जाकर अपनी फसल विक्रय की जाती है इसके अलावा ग्राम में श्री राधा कृष्ण का ऐतिहासिक मंदिर भी देखने लायक है ग्राम पंचायत के द्वारा स्थानीय ग्राम के साथ-साथ अन्य फलियों में भी पेयजल सड़क तथा विद्युत की समुचित व्यवस्था की गई है करड़ावद ग्राम अफीम कि फ़सल के लिए भी जाना जाता है यहां का किसान उन्नत फसलों का उत्पादन कर अच्छा मुनाफा कमा लेते है यहां के किसानों के द्वारा मुख्य रूप से गेहूं तथा सोयाबीन की फसलों के साथ-साथ अन्य फसलों का भी उत्पादन कर आय अर्जित करते हैं इसके साथ ही वर्षों पूर्व यहां पर बड़ी मात्रा में अफीम उत्पादक के रूप में यह ग्राम जाना जाता था लेकिन शासन की नीतियों के कारण या इस क्षेत्र को छोड़ देने के कारण यहां के किसानों में मायूसी छा गई थी लेकिन लगातार संबंधित विभाग तथा जनप्रतिनिधियों से किसानो के द्वारा अफीम की खेती के लिए मांग करने पर वर्ष 2023-24 में करड़ावद के 7 किसानों को 10 आरी यानि (40*126=505 स्क्वायर फीट) दिया गया था, इसके बाद वर्ष 2024-25में 8 किसानों को अफीम खेती के लिए 10 आरी स्वीकृति प्रदान की गई थी अफीम उत्पादक किसान तेजू पिता नाथू लाल आंजना ने बताया कि लेकिन वर्ष 2025-26 में नारकोटिक्स विभाग के द्वारा 1किसान कि बढ़ोतरी के 9 किसानो पट्टे (आदेश )नियमों में परिवर्तन कर 10 आरी के स्थान पर 5 आरी अफीम फसल की बुवाई के लिए आदेश जारी किया गया इसके उपरांत किसानो के द्वारा 5 आरी जमीन में ही अफीम की फसल कि बुवाई गई,जिसका नारकोटिक्स विभाग के द्वारा समय-समय पर सीमांकन किया जाता है। जो इस वर्ष भी गत दिवस नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों के द्वारा नियमानुसार फसल का सीमांकन किया गया.। 5 आरी अफीम की फसल की बुवाई से लेकर डोडा चूरा निकलने तक किसानों को लगभग 15 से ₹20 हजार रुपए खर्च होगा। फ़सल पकने के बाद डोडा छोरा नारकोटिक्स विभाग को बेचा करवाया जाता है जिसका सरकार के द्वारा नियत कीमत पर खरीदारी की जाती है. अफीम की फसल लगभग 120 दिन मैं तैयार होती है कोइस प्रकार एक किसान को पांच आदि अफीम की फसल से लगभग 20 से 25000 रुपए का मुनाफा होता है।




