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झाबुआ में साक्षरता का उत्सव : जब 75 साल के बुजुर्ग ने कहा—“अब मैं अपने पूरे परिवार के नाम लिख लेता हूं”।

 

झाबुआ@हरीश यादव

नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत झाबुआ जिले में बुनियादी मूल्यांकन परीक्षा रविवार को बड़े ही उत्साह और उल्लास के साथ संपन्न हुई। जिले में कुल 1,163 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जहां सुबह 10 बजे से ही शिक्षार्थी पहुंचना शुरू हो गए। परीक्षा का माहौल इतना जोशपूर्ण था कि कई जगह यह एक उत्सव जैसा दिखाई दिया।

74 हजार का लक्ष्य, 63 हजार ने दी परीक्षा

राज्य सरकार ने झाबुआ जिले को 74,000 शिक्षार्थियों का लक्ष्य दिया था। इस लक्ष्य में से लगभग 63,000 लोगों ने परीक्षा में भाग लिया। परीक्षा के दौरान जिलाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर पहुंचकर शिक्षार्थियों से बातचीत की और उनका उत्साह बढ़ाया।

बुजुर्गों का जज़्बा बना प्रेरणा

इस परीक्षा में बुजुर्गों का जोश सबसे खास रहा।

राम विकासखंड के झुमका परीक्षा केंद्र पर 75 वर्षीय केलम डावर ने मुस्कुराते हुए कहा, “पढ़ने-लिखने में मजा आ गया।”

76 साल के सिंह खराड़ी ने बताया, “अब मैं अपने पूरे परिवार के नाम लिख लेता हूं और पढ़ भी लेता हूं।”

76 वर्षीय विधवा संतु बदिया ने गर्व से कहा, “अब मैं अनपढ़ नहीं हूं। हाव हूं वगर भणेली नी मल्डे।”इनके अनुभवों ने बाकी शिक्षार्थियों को और ज्यादा प्रेरित किया। हर उम्र का साथ, सास-बहू तक ने दी परीक्षा परीक्षा का नज़ारा कई जगह अनोखा रहा। कहीं सास और बहू एक साथ बैठकर परीक्षा देती नजर आईं, तो कहीं पूरा परिवार परीक्षा में शामिल हुआ। हर केंद्र पर औसतन 30 से 40 शिक्षार्थियों ने भाग लिया।

टीम का समर्पण, जिले की बड़ी उपलब्धि

झाबुआ जिले की साक्षरता टीम ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ काम किया। यही वजह रही कि परीक्षा सुचारू रूप से और बड़े पैमाने पर सफलतापूर्वक आयोजित हो सकी। परीक्षा के बाद शिक्षार्थियों के चेहरों पर आत्मविश्वास और संतोष साफ दिखाई दे रहा था।

झाबुआ में साक्षरता का यह अभियान सिर्फ परीक्षा भर नहीं रहा, बल्कि यह साबित कर गया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।

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