श्रीमद् भागवत कथा में ही जीवन का सार है,,,जिसे बुराई की आदत होती है उसे अच्छाई में भी बुराई दिखाई देती है पंडित श्री कमलेश जी शास्त्री..!

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सारंगी@संजय उपाध्याय
श्री खेड़ापति हनुमान जी मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद् भागवत गीता में पूज्य गुरुदेव ने श्रोताओं से कहा भागवत कथा को कभी इस भाव से नहीं सुनना चाहिए कि हमें कुछ भौतिक मिल जाए भावना यह होनी चाहिए कि हमें कृष्ण मिल जाए जब मनुष्य प्रभु के पास जाता है तो अपनी समस्याओं का समाधान होता है लेकिन जिस पूजा में स्वार्थ छुपा हो वह पूजा नहीं कहलाती है। उन्होंने कृष्ण जन्म से लेकर कृष्ण लीला का विस्तार पूर्वक वर्णन किया उन्होंने ध्रुव एवं प्रहलाद चरित्र का प्रेरणादाई वर्णन किया उन्होंने कहा जिसमें बुराई की आदत होती है उसमें अच्छाई में भी बुराई दिखाई देती है ऐसा व्यक्ति मक्खी के समान होता है जो सुगंध को छोड़कर गंदगी पर बैठती है यदि श्रद्धा और विश्वास से प्रभु को पुकारा जाय तो प्रभु स्वयं अपने भक्त की व्यवस्था कर देते हैं हरि का नाम भजलो मृत्यु से पहले मुक्ति का मार्ग यह संदेश देते हुए पंडित शास्त्री जी ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी अपनि परंपराओं और और संस्कारों को भूलते जा रही है आने वाली पीढ़ी को श्राद्ध पक्ष और धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व पता नहीं रहेगा। कथा पंडाल में रुक्मणी कृष्ण विवाह भी हुआ जिसमें भक्तों ने भजनों पर नृत्य किया कथा श्रवण करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं कथा समापन के बाद महा आरती एवं महाप्रसादी का वितरण किया जा रहा है।




