जिला आपदा प्रबंधन समिति की एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन संपन्न, केमिकल आपदा को बताया सबसे खतरनाक..!

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मेघनगर@मुकेश सोलंकी
कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के निर्देशन में जिला आपदा प्रबंधन समिति के तत्वाधान में स्थानीय औद्योगिक केंद्र विकास निगम परिसर में एकदिवसीय कार्यशाला संपन्न हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती पूजन , दीप प्रज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत से हुआ। कार्यक्रम में डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट शशिधर पिल्लई ने केमिकल से होने वाली आपदाओं को सबसे गंभीर एवं खतरनाक बताया। उन्होंने बताया कि यदि समय रहते किसी भी आपदा का कुशलता पूर्वक प्रबंध कर दिया जाए तो आपदा से होने वाले नुकसान को कई गुना काम किया जा सकता है और इसके लिए आवश्यक है कि प्रत्येक नागरिक विशेष कर केमिकल कारखानों के कर्मचारियों को केमिकल से होने वाली आपदाओं से निपटने की जानकारी होना बहुत ही आवश्यक है। कार्यक्रम में हार्ट अटैक के दौरान सीपीआर विधि का महत्व एवं अग्निशमन उपकरणों के उपयोग की विधि के साथ दुर्घटना के समय तत्काल किए गए प्राथमिक उपचार के महत्व को बताया।
इंदौर से आमंत्रित सेफ्टी कंसल्टेंट वैशाली अग्रवाल ने भोपाल गैस त्रासदी का उदाहरण देते हुए कहा कि कई कारखाना संचालकों द्वारा चंद रूपयों को बचाने के लिए सुरक्षा मानकों को अनदेखा कर दिया जाता है और इसी के चलते गंभीर दुर्घटनाओं से भीषण जन-धन और प्रकृति की हानि होती है। उन्होंने केमिकल दुर्घटना के दौरान होने वाले गंभीर दुष्परिणाम एवं उनसे बचने के बारे में भी बारीकी से जानकारी दी। कार्यशाला में अनु विभागीय अधिकारी श्रीमती रितिका पाटीदार, तहसीलदार पल्केश परमार , राहुल सिंह वर्मा सीएमओ नगर परिषद एवं थाना प्रभारी के. एल. वरकड़े उपस्थित रहे। कार्यशाला में गेल इंडिया लिमिटेड के अधिकारी ने कहा कि कारखाने में होने वाली ज्यादातर दुर्घटनाएं मानवीय त्रुटि के कारण ही होती है यदि सुरक्षा नियमों का गंभीरता से पालन किया जाए तो अनेक बड़ी दुर्घटनाओं को आसानी से टाला जा सकता है।
ठंड के मौसम में फैक्ट्री संचालको एवं सेफ्टी कर्मचारियों के छुंटे पसीने
कार्यक्रम के दौरान इंदौर से आई वैशाली अग्रवाल द्वारा कारखाना संचालकों एवं सेफ्टी कर्मचारियों से केमिकल से संबंधित प्रश्न पूछ कर केमिकल संबंधित उनके ज्ञान को परखना चाहा, जिसमें कई कंपनी संचालकों एवं कर्मचारीयों की बोलती बंद हो गई । पानी, हवा या एक केमिकल के दूसरे केमिकल से संपर्क में आने पर होने वाले परिवर्तन एवं केमिकल्स के शॉर्ट फॉर्म- फुल फॉर्म जैसे सामान्य प्रश्नों को लेकर भी केवल ओसवाल ग्रुप के कर्मचारी ही सक्रिय दिखाई दिए। अधिकांश कारखाना संचालकों एवं सुरक्षा स्टाफ को ही संबंधित केमिकल का समुचित ज्ञान नहीं होना क्षेत्र के नागरिकों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से चिंतनीय विषय है।





