
Jhabuahulchul
झाबुआ डेस्क। किसानों से जुड़े एक गंभीर मामले में शासकीय आदिम जाति संस्था खवासा के संस्था प्रबंधक पर किसानों के बचत खातों से संबंधित बैंक निकासी (कैश विड्रॉल) फॉर्म भरवाकर उन्हें अपने पास सुरक्षित रखने और किसानों के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप लगे हैं। इस संबंध में ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विभागीय अधिकारी, तहसील थांदला को लिखित आवेदन देकर तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है।
आवेदन में कहा गया है कि संस्था प्रबंधक द्वारा किसानों से खाली या हस्ताक्षरित कैश विड्रॉल फॉर्म लेकर उन्हें कार्यालय में रखा जा रहा है, जो कि भारतीय रिज़र्व बैंक एवं बैंकिंग नियमों का खुला उल्लंघन है। इस तरह की गतिविधि से किसानों में भारी रोष व्याप्त है और वे स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

वीडियो रिकॉर्डिंग में स्वीकारोक्ति का दावा
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया कि संस्था प्रबंधक से जब व्यक्तिगत रूप से पूछताछ की गई, तो उन्होंने कैमरे पर यह स्वीकार किया कि शासन द्वारा किसानों के लिए फसल हेतु दी जाने वाली राशि को केवल कागजों में डालकर पुनः निकाल लेने का काम उनके पास है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह कार्य उन्हें बैंक प्रबंधक द्वारा मौखिक आदेश के रूप में सौंपा गया है।
गंभीर अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप
आवेदनकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह मामला बेहद गंभीर अनियमितता और भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है, जिसमें किसानों के अधिकारों का खुला दुरुपयोग किया जा रहा है। शासन की राशि कागजी प्रक्रिया के माध्यम से दिखाकर वापस निकाल लेना किसानों के हितों के विरुद्ध है और यह एक दंडनीय अपराध माना जाएगा।
मांगें….
आवेदकों ने अपनी शिकायत में तीन प्रमुख मांगों को शामिल किया है—
1. पूरा प्रकरण की तत्काल उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
2. दोषी संस्था प्रबंधक के खिलाफ कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
3. जांच लंबित रहने तक संबंधित कर्मचारी को निलंबित किया जाए ताकि निष्पक्ष जांच संभव हो सके।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो किसान और सामाजिक संगठन इस मुद्दे पर बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।





