एसबीआई मेघनगर शाखा पर भेदभाव के आरोप,,,दीपावली पर नए नोट बांटने में ‘खास’ लोगों को वरीयता,,आम ग्राहको द्वारा नये नोट मांगने पर खाता बंद करने का दबाव,,,बैंक के साईन बोर्ड पर उच्चाधिकारियों के सम्पर्क नम्बर और पते गायब…!

#Jhabuahulchul
मेघनगर@मुकेश सोलंकी
दीपावली पर नए नोट पाने की उम्मीद लगाए सैकड़ों ग्राहकों को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की मेघनगर शाखा में हताशा और पक्षपात का सामना करना पड़ा। ग्राहकों ने बैंक प्रबंधन पर मनमाने तरीके से काम करने, ‘चहेते’ लोगों को प्राथमिकता देने और आम लोगों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
जैसे ही नए नोटों के आने की सूचना मिली, बैंक के बाहर बुधवार सुबह से ही लंबी कतारें बननी शुरू हो गईं। लेकिन जल्द ही ग्राहकों का उत्साह गुस्से और निराशा में बदल गया। लाईन में लगे गाहकों के लिये बैंक प्रबंधन लगातार नियम बदल रहा था। कतार में लगे लोगों का कहना था कि आम ग्राहकों को मात्र एक या दो हजार रुपए के नोट ही मिल रहे थे, जबकि प्रभावशाली लोग बड़ी मात्रा में नए नोट लेकर जा रहे थे।

पारदर्शिता का अभाव, ग्राहकों में आक्रोश…..
नए नोटों के वितरण में किसी तरह की कोई स्पष्ट नीति नजर नहीं आई। ग्राहकों के अनुसार, बैंक कर्मचारी समय-समय पर नए नियम बता रहे थे। पहले कहा गया कि केवल खाताधारकों को ही नोट मिलेंगे, फिर कहा गया कि एक व्यक्ति को सिर्फ एक हजार रुपए के नोट दिए जाएंगे, और बाद में बैंक मैनेजर से चेक के पीछे सिफारिश लिखवाना जरूरी बता दिया गया।
एक ग्राहक निमिष जैन ने कहा नये नोट मांगने पर हमे खाता बंद करवाने के लिये बैंक मैनेजर द्वारा दबाव डाला जा रहा है । यह पूरी तरह से मनमानी है। नये नोट के लिये हम सुबह से खड़े हैं, लेकिन जब बारी आती है तो नियम बदल जाते हैं। जो लोग अंदरूनी तौर पर जुड़े हुए हैं, वे दस-दस हजार रुपए के नए नोट ले जा रहे हैं, जबकि हमें बैंक मैनेजर द्वारा खाता बंद करने की धमकी दी जा रही है”
एक अन्य ग्राहक तरुण पाटीदार ने कहा, यह सीधा भ्रष्टाचार है। हम सबका पैसा एक जैसा है, फिर बैंक मैनेजर यह कैसे तय कर सकता है कि किसे कितने नोट मिलें? यह ‘मुँह देखकर नोट बांटने’ जैसा है। जिसका रसूख है, उसे पूरे नोट मिल रहे हैं और आम आदमी को टरका दिया जाता है और बैंक के खाते बंद करने के लिये दबाव बनाया जा रहा है”
बैंक प्रबंधन का अस्पष्ट रुख…..
इस मामले में बैंक प्रबंधक दीप्ति चन्द्रवंशी का कहना था कि नोटों का वितरण खाताधारकों के आधार पर किया जा रहा था और केशियर को मेरे द्वारा चेक के पीछे लिखे गए निर्देशों के आधार पर नोट दिए जा रहे थे।
हालांकि, जब बैंक में आई नई करेंसी की कुल राशि के बारे में पूछा गया, तो प्रबंधक ने इसे गोपनीय बताया, जबकि अन्य बैंकों ने यह जानकारी सार्वजनिक की थी।
शिकायत दर्ज कराने की तैयारी….
इस पूरे प्रकरण ने ग्राहकों में गहरा रोष पैदा किया है। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष कलसिंह मचार ने कहा कि बैंक के सूचना बोर्ड पर शिकायत के लिए उच्च अधिकारियों के संपर्क नंबर उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जो ग्राहकों के अधिकारों का हनन है। हमें हमारे खाते बंद करने के लिये कहा जा रहा है। इस मामले की तुरंत जांच हो और दोषी अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, साथ ही उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाया जाए।
दीपावली जैसे पावन पर्व पर ग्राहकों के साथ हुए इस भेदभाव ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पारदर्शिता और समान व्यवहार पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ग्राहक कलसिंग मचार का कहना है कि वे इस मामले को बैंक के उच्च अधिकारियों तक ले जाएंगे और शिकायत दर्ज कराएंगे।




