बेधड़क किसानों को लूटो,,क्योंकि सरकार सो रही है।,,अभी से खाद की कालाबाजारी शुरू,,काले बाजार मे 500 बिक रही 45 किलोग्राम युरिया बेग,,भाव को लेकर जरा सी टिकलरी तो जादू से खाद गायब..!

#Jhabuahulchul
बामनिया@जितेंद्र बैरागी
इस वर्ष जिले में वह किसान खुश नसीब होंगे। जिनकी एक बुवाई में फसल बाहर निकल गई। वरना तीन तीन बार बुवाई के बाद भी फसल के अते-पते नहीं है।
अब शुरू होता है खेत में खाद डालने का दौर।
इतने संघर्ष के बाद खेत में पौधा अब थोड़ा बड़ा होते नजर आ रहा है। जिसमें अब किसानों को खेतों में यूरिया खाद उड़ानें की जरूरत है। बामनिया के आसपास के किसान अपनी आप बीती सुनाते हुए बताते हैं। पूरे बामनिया में घूम कर पुछ लिया एक भी दुकान पर यूरिया खाद की बोरी नहीं मिल रही। अब सवाल यह उठता है। चुम्मा चुम्मा 8 दिन हुए नहीं।और पूरी गर्मी में आए हुए ट्रेको बंद खाद बाजार से गायब केसे हो गया।
किसान यदि दुकान पर सेठ जी से भाव को लेकर सवाल पूछ लेता है तो (ये तो नेतागिरी करता है)। खाद नहीं है बोलकर भगा दिया जाता है। क्योंकि सेठ जी की दुकान कहीं और गोदाम कहीं और रहते हैं। इस स्थिति में किसान जो भी भाव हो सेट जी आप तो बस मुझे युरिया खाद दे दो बस।
दिलीप डामर निवासी ग्राम सातेर ने बताया पुरे बामनिया में घूमने के बाद। पेटलावद के थांदला रोड पर किसी मुकेश भंडारी नामक दुकान से 500 रूपए प्रति बोरी के हिसाब से दो बोरी में लाया।




