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झाबुआ@आयुष पाटीदार
ग्राम भामल में दूषित पानी पीने से गांव के कई लोग बीमार हो गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इस घटना में एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है। हालांकि प्रशासन ने दूषित पानी से बीमारी की बात से इनकार किया है, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने से प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। मामले की जांच की जा रही है कि अचानक इतने लोग कैसे बीमार पड़े।
स्थिति यह है कि लगातार मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है, क्योंकि शासकीय अस्पतालों की हालत बद से बदतर हो चुकी है। सोमवार को भामल के मरीजों की हालत फिर बिगड़ने पर उन्हें पेटलावद के शासकीय अस्पताल लाया गया, जहां से उन्हें झाबुआ जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
झाबुआ जिला अस्पताल में मरीजों के साथ अमानवीय व्यवहार सामने आया। अस्पताल पहुंचने पर भामल के मरीज को बेड नसीब नहीं हुआ और घंटों तक उन्हें जमीन लिटा रखा गया और जमीन पर ही बाटल चढ़ा जा रही हे ,ओर चार घंटे बाद ड्रिप चढ़ाई गई, लेकिन उसके बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने परिजनों से ‘चाय-पानी’ के नाम पर पैसे की मांग भी कर डाली। इस लचर व्यवस्था से परेशान होकर कई मरीजों ने अपना इलाज पेटलावद के निजी अस्पताल चोयल अस्पताल में करवाया ।
जिला शासकीय अस्पताल की दुर्दशा का हाल फोटो में साफ देखा जा सकता है। यह फोटो अभी तत्काल झाबुआ हलचल द्वारा लिया गया है जिसमें मरीज का नाम नरसिंह मालवीय भामल बताया जा रहा है। इस मामले में प्रशासन की निष्क्रियता और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।





