भागवत कथा के दूसरे दिन राम नाम, भक्ति और संगति का महत्व बताया..

रायपुरिया@राजेश राठौड़
ग्राम बरवेट में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को कथा साध्वी श्रीसुगुना बाईसा गौसवा कुंज उज्जैन ने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है।
कथा व्यास ने पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया। कहा कि परीक्षित कलियुग के प्रभाव के कारण ऋषि से श्रापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव जी के पास जाते हैं। भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है।
भागवत सप्ताह के दुसरे दिवस की कथा मे साध्वी श्री ने प्रभु श्री राम का चरित्र चित्रण किया। उन्होंने राम नाम की महिमा का वर्णन किया। भगवान श्री राम की सेना द्वारा निर्मित रामसेतु का महत्व बताया। उन्होने कहा राम का नाम लिखे पत्थर भी तैर गए।इस दौरान भक्ति का महत्व बताया।उन्होंने कहा भक्ति आत्मा का विषय है।नारद जी प्रभु के अनन्य भक्त हुए।जीवन मे अपना आहार शुद्ध रखो। सात्विक एवं शुद्ध भोजन से शुद्ध बुद्धि का निर्माण होता है।जैसा अन्न ग्रहण करते है वैसा ही मन होता है।
उन्होने अच्छी संगति में रहने की बात कही।साध्वी श्री ने कहा आप जिस प्रकार की संगति में रहेंगे वैसा ही जीवन हो जाएगा।हमेशा सज्जन और संतो का संग करना चाहिए।इसके बाद भजन गाकर संदेश दिया कि जीवन मे सुख दुख मे सदैव मुस्कुराना चाहिए।यह बात हमें संतो से सीखना चाहिए।साध्वी श्री ने उमा शंभु संवाद का वर्णन किया।भोलेनाथ के स्वरुप को लेकर वृतांत सुनाया।इसके बाद “भोलेनाथ से निराला कोई और नही है” भजन पर शिवमय माहौल बना दिया।इस दौरान महिलांए भाव विभोर हो नृत्य करने लगी।”म्हारे हरिया वन रा सुवटिया”भजन पर भक्तजन आनंदित हो गए। कथा श्रवण करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।
कथा के दौरान श्रीकृष्णा कमदेहू गौशाला बनी के संस्थापक आचार्य देवेंद्र शास्त्री के परम शिष्य मुकेश पाटीदार, हरिराम पाटीदार (शिक्षक), पंकज पाटीदार, शांतिलाल पाटीदार, कामधेनु गौशाला परिवार एव बारवेट राजघराने के अनिरुद्ध सिंह राठौर आदि द्वारा साध्वी जी का का स्वागत सत्कार किया। आरती का लाभ अर्जुन पाटीदार परिवार ने लिया।





