रायपुरिया

धधकते अंगारों पर आस्था की पराकाष्ठा: गल घूमकर मन्नतधारियों ने उतारी मन्नत, हजारों ग्रामीण बने साक्षी…

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रायपुरिया@राजेश राठौड़

एक ओर दोपहर का तपता सूर्य, दूसरी ओर धधकते अंगारों से भरी चुल… और इन दोनों के बीच अटूट श्रद्धा, सच्ची भक्ति और अद्भुत विश्वास का दृश्य। धुलेटी के पावन अवसर पर रायपुरिया में आयोजित पारंपरिक गल एवं चुल मेले में आस्था का अनोखा संगम देखने को मिला। मन्नतधारी महिलाओं ने नंगे पांव जलते अंगारों पर चलकर अपनी मन्नत उतारी, तो पुरुष श्रद्धालुओं ने 25 फीट ऊंचे गल पर घूमकर अपने संकल्प पूर्ण किए। इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए हजारों की संख्या में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी।

आस्था का अनोखा अनुष्ठान

पश्चिम मध्यप्रदेश के ग्रामीण अंचलों में यदि सच्ची श्रद्धा और विश्वास का उदाहरण देखना हो तो रायपुरिया का यह मेला विशेष पहचान रखता है। मान्यता है कि जब परिवार पर कोई संकट आता है, संतान प्राप्ति में बाधा होती है या कोई मनोकामना अधूरी रह जाती है, तब भक्तजन गल देवता एवं चुल माता से मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूर्ण होने पर वे सार्वजनिक रूप से अपनी श्रद्धा प्रकट करते हुए मन्नत उतारते हैं।

25 फीट ऊंचे गल पर घूमता विश्वास

गल लगभग 25 फीट ऊंचा बनाया जाता है, जिसमें पांच मजबूत खंभों पर मचान तैयार किया जाता है। ऊपर एक लंबा बांस स्थापित किया जाता है, जिस पर मन्नतधारी को विशेष विधि से बांधा जाता है। श्रद्धालु को उल्टा लिटाकर, हाथ जोड़ने की मुद्रा में पूरे गल पर घुमाया जाता है। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच यह दृश्य उपस्थित लोगों के लिए रोमांच और श्रद्धा का संगम बन जाता है।

 धधकती चुल पर नंगे पांव चली महिलाएं

वहीं दूसरी ओर लगभग 5 से 7 फीट लंबी अंगारों से भरी चुल तैयार की जाती है। मन्नतधारी महिलाएं “जय हिंगलाज माता” के उद्घोष के साथ नंगे पांव इन धधकते अंगारों पर चलकर अपनी श्रद्धा प्रकट करती हैं। तेज गर्मी के बावजूद उनके चेहरे पर विश्वास और संतोष की झलक स्पष्ट दिखाई देती है।

मन्नत पूरी होने पर उमड़ा विश्वास

गांव सुवापाट की मन्नतधारी सुशीला बाई ने बताया कि उनके परिवार में पुत्र की कमी थी। किसी के सुझाव पर उन्होंने चुल माता से मन्नत मांगी। मन्नत पूर्ण होने पर वे इस वर्ष अपनी मन्नत उतारने पहुंचीं। इसी प्रकार गांव काजबी के लीला भाई ने भी बताया कि चुल माता की कृपा से उनकी मनोकामना पूर्ण हुई, जिसके प्रति आभार व्यक्त करने वे मेले में शामिल हुए।

 50 वर्षों से जीवंत परंपरा

गांव में गल एवं चुल की स्थापना को लगभग 50 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। गल देवता की पूजा-अर्चना गांव के घोड़ाथल गणावा परिवार द्वारा की जाती है। गांव के श्याम गणावा ने बताया कि पूर्व सरपंच ठाकुर डूंगर सिंह राठौर द्वारा गल मेले के लिए भूमि उपलब्ध कराई गई थी। तब से यह आयोजन निरंतर इसी स्थल पर होता आ रहा है।

 सामाजिक एकता का प्रतीक

यह मेला केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और पारंपरिक संस्कृति का प्रतीक भी है। दूर-दूर के ग्रामीण परिवार सहित यहां पहुंचते हैं और पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बना रहता है।

धुलेटी के इस विशेष अवसर पर रायपुरिया में आस्था, परंपरा और विश्वास का जो अद्भुत संगम देखने को मिला, वह ग्रामीण संस्कृति की गहराई और लोक श्रद्धा की शक्ति को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।

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